राजस्थान के अब तक के मुख्यमंत्रियों का शासन बहुआयामी अनुभवों से भरा रहा है, जिसमें प्रशासनिक दक्षता, सामाजिक न्याय, विकासात्मक प्राथमिकताओं और राजनीतिक स्थिरता-इन सभी के विविध रूप देखने को मिलते हैं। हीरालाल शास्त्री और जय नारायण व्यास जैसे प्रारंभिक मुख्यमंत्रियों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रशासनिक ढांचे की नींव रखी। भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाना भी ऐसा ही एक निर्णय था, जिसने आरंभ में अनेक लोगों को आश्चर्य में डाला। किंतु समय ने सिद्ध कर दिया है कि यह निर्णय केवल गहरी राजनीतिक समझ और दूरदृष्टि पर आधारित था। मुख्यमंत्री पद संभालते ही भजनलाल शर्मा ने यह साफ कर दिया कि वे सत्ता को साधन मानते हैं, साध्य नहीं। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान जीरो टॉलरेंस की नीति है, जो केवल कागजों या भाषणों तक सीमित नहीं रही। विशेष रूप से पेपर लीक माफिया के खिलाफ की गई कार्रवाई ने सरकार की मंशा और मुख्यमंत्री के साहस को स्पष्ट रूप से उजागर किया। राजस्थान में भजन राज का अर्थ केवल सत्ता का संचालन नहीं, बल्कि भरोसे का शासन है।





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